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अरदास क्या है? | Ardas in hindi

ardas in hindi

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Full Ardas in hindi

अगर आप सिख समुदाय से आते हो, तो आपको पता होगा कि अरदास क्या है. परंतु दूसरे समुदाय के ज्यादातर लोगो को अरदास के बारे में पता नही होता. कई लोगो के मन में यह प्रश्न होता है की, अरदास Ardas in hindi क्या है.

अरदास (Ardas) क्या है?

सिख समुदाय में दुख हो या खुशी में अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अरदास किया जाता है. सिख धर्म की परंपराओं में अरदास का एक मानक रूप है, जो गुरुद्वारों में प्रतिदिन की जाती है. Guru Ardas in hindi अरदास किसी भी महत्वपूर्ण और खुशी के कार्य को आरंभ करने से पहले और बाद में को जाती है.

Guru Ardas in Hindi

किसी भी काम को शुरू करने से पहले काम की सफलता के लिए अरदास करनी और कार्य की समाप्ति के बाद धन्यवाद देने के लिए अरदास करनी बड़ी ही शुभ मानी जाती है. सिख समुदाय में अपने दिन की शुरुआत अरदास से करना बड़ा ही शुभ माना जाता है.

• अरदास का सामान्य अर्थ परमशक्ति के आगे विनती करना है.

Antim Ardas in hindi

ੴ एक ओंकार वाहेगुरू जी की फतेह।। श्री भगौती जी सहाय।। वार श्री भगौती जी की पातशाही दसवीं।।

प्रिथम भगौती सिमरि कै गुरु नानक लई धिआइ ॥
फिर अंगद गुरु ते अमरदास रामदासै होई सहाय।।

अरजन हरगोबिंद नो सिमरौ श्री हरिराय।।
श्री हरिकृषन ध्याइये जिस डिठै सभ दुख जाए।।
तेग बहादर सिमरियै घर नौ निध आवै धाय।।
सभ थाईं होए सहाय।।
दसवां पातशाह गुरु गोविंद साहिब जी ! सभ थाईं होए सहाय।।

दसां पातशाहियां दी जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी दे पाठ दीदार दा ध्यान धर के बोलो जी वाहेगुरु ! पंजां प्यारेयां, चौहां साहिबज़ादेयां, चालीयां मुक्तेयां, हठीयां जपीयां, तपीयां, जिनां नाम जपया, वंड छकया, देग चलाई, तेग वाही, देख के अनडिट्ठ कीता, तिनां प्यारेयां, सचियारेयां दी कमाई दा ध्यान धर के, खालसा जी ! बोलो जी वाहेगुरु !

जिनां सिंहा सिंहनियां ने धरम हेत सीस दित्ते, बंद बंद कटाए, खोपड़ियां लहाईयां, चरखियां ते चढ़े, आरियां नाल चिराये गए, गुरद्वारेयां दी सेवा लई कुरबानियां कीतियां, धरम नहीं हारया, सिक्खी केसां श्वासां नाल निभाई, तिनां दी कमाई दा ध्यान धर के, खालसा जी ! बोलो जी वाहेगुरु ! पंजां तख्तां, सरबत गुरद्वारेयां, दा ध्यान धर के बोलो जी वाहेगुरु !

प्रिथमे सरबत खालसा जी दी अरदास है जी, सरबत खालसा जी को वाहेगुरु, वाहेगुरु, वाहेगुरु चित्त आवे, चित्त आवण दा सदका सरब सुख होवे। जहां जहां खालसा जी साहिब, तहां तहां रछया रियायत, देग तेग फतेह, बिरद की पैज, पंथ की जीत, श्री साहिब जी सहाय, खालसे जी के बोलबाले, बोलो जी वाहेगुरु ! सिक्खां नूं सिक्खी दान, केस दान, बिबेक दान, विसाह दान, भरोसा दान, दानां सिर दान, नाम दान श्री अमृतसर साहिब जी दे स्नान, चौकियां, झंडे, बुंगे, जुगो जुग अटल, धरम का जैकार, बोलो जी वाहेगुरु ! सिक्खां दा मन नीवां, मत उच्ची मत दा राखा आप वाहेगुरु।

हे अकाल पुरख आपणे पंथ दे सदा सहाई दातार जीओ! श्री ननकाना साहिब ते होर गुरद्वारेयां, गुरधामां दे, जिनां तों पंथ नूं विछोड़या गया है, खुले दर्शन दीदार ते सेवा संभाल दा दान खालसा जी नूं बख्शो। हे निमाणेयां दे माण, निताणेयां दे ताण, निओटेयां दी ओट, सच्चे पिता वाहेगुरू ! आप दे हुज़ूर ……… दी अरदास है जी।

अक्खर वाधा घाटा भुल चूक माफ करनी। सरबत दे कारज रास करने। सोई पियारे मेल, जिनां मिलया तेरा नाम चित्त आवे। नानक नाम चढ़दी कलां, तेरे भाणे सरबत दा भला। वाहेगुरू जी का खालसा, वाहेगुरू जी की फतेह॥

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